hashed password 1 की एक छिपी हुई सच्चाई यह है कि उन्हें ठीक से लागू करना भी एक चुनौती हो सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वे अपनी तकनीक में उचित ‘सल्ट’ का उपयोग करें। सल्ट एक यादृच्छिक डेटा का टुकड़ा है जो पासवर्ड के साथ मिलकर उसे और अधिक सुरक्षित बनाता है। यदि सल्ट का सही उपयोग न किया जाए, तो हैशिंग की प्रक्रिया का पूरा फायदा नहीं मिलता।

इतना ही नहीं, हेकर इसी बात का फायदा उठाते है। अगर सल्ट का उपयोग सही ढंग से नहीं होता, तो पासवर्ड के समान हैश प्राप्त करना बहुत आसान हो जाता है। इससे सुरक्षा समझौतों की संभावना बनी रहती है। परन्तु, यह सल्ट के उपयोग की केवल एक बानगी है, विशेषज्ञों ने इसका प्रभाव पूरी तरह नहीं समझा है।
hashed passwords की जटिलता का अगला पक्ष यह है कि यह एकल सुरक्षा रणनीति नहीं है। अक्सर दूसरी सुरक्षा प्रक्रियाओं जैसे दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के साथ इनका प्रयोग किया जाता है। पर क्या आपको पता है कि यहाँ भी समस्याएँ हो सकती हैं अगर यह संयोजन सही ढंग से नहीं किया जाता है? यह तकनीकी पहलू और भी अधिक जटिल हो जाता है।
एक अन्य कमी यह है कि काफ़ी कंपनियां अभी भी पुराने और निष्क्रिय हैशिंग उपयोग में ले हैं, जो उनकी सुरक्षा प्रणाली को कमजोर बना रही हैं। क्या आप जानते हैं कुछ नई तकनीकों का उपयोग कर इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है? यह मुख्य रूप से सुरक्षा की बदलती जरूरतों को समझने पर निर्भर करता है।